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भूमिहारब्राह्मण की उत्पति
भूमिहार ब्राह्मण भगवन परशुराम को प्राचीन समय से अपना मूल पुरुष और कुल गुरुमानते है
१. एम.ए. शेरिंग ने १८७२ में अपनी पुस्तक Hindu Tribes & Cast में कहा है कि,"भूमिहार जातिके लोग हथियार उठाने वाले ब्राहमण हैं
(सैनिक ब्राह्मण)।"
२. अंग्रेज विद्वान मि. बीन्स ने लिखा है - "भूमिहार एक अच्छी किस्म कीबहादुर प्रजाति है, जिसमे आर्य जाति की सभी विशिष्टताएं विद्यमान है। ये स्वाभाव से निर्भीक व हावीहोने वालें होते हैं।"
३. पंडित अयोध्या प्रसाद ने अपनी पुस्तक "वप्रोत्तम परिचय" मेंभूमिहार को- भूमि की माला या शोभा बढ़ाने वाला, अपने महत्वपूर्ण गुणों तथा लोकहितकारी कार्यों से भूमंडल कोशुशोभित करने वाला, समाज के हृदयस्थल पर सदा विराजमान
- सर्वप्रिय ब्राह्मण कहा है।
४. विद्वान योगेन्द्र नाथ भट्टाचार्य ने अपनी पुस्तक हिन्दू कास्ट & सेक्ट्स में लिखा है की भूमिहार ब्राह्मण की सामाजिक स्थिति का पता उनके नाम से ही लग जाता है, जिसका अर्थ है भूमिग्राही ब्राह्मण। पंडितनागानंद वात्स्यायन द्वारा
लिखी गई पुस्तक - " भूमिहार ब्राह्मण इतिहास के दर्पण में"
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